- कलाकारों, रंगकर्मियों, कला विशेषज्ञों, फिल्मकारों और समाजसेवियों की उपस्थिति में हुआ सभा का आयोजन
मधुबनी नगर के महिला कॉलेज के समीप कामाख्या भवन में रविवार दोपहर एक कला-सभा का आयोजन किया गया, जिसमें मिथिला आर्टिस्ट एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य, युवा कलाकार, कला विचारक, रंगकर्मी, फिल्मकार एवं समाजसेवी उपस्थित हुए।
गौरतलब है कि मिथिला की बेटी एवं प्रतिभाशाली कलाकार गुंजेश्वरी देवी की दहेज़ के मामले में हुई हत्या से कलाकार वर्ग में शोक की लहर दौड़ गई, जिसके बाद मिथिला कला के प्रबुद्ध वर्ग ने युवा कलाकारों के सामाजिक-आर्थिक सहायता के लिए मिथिला आर्टिस्ट एसोसिएशन के गठन का फैसला किया।
मधुबनी से कौशिक झा, प्रतीक प्रभाकर, रांटी से अविनाश कर्ण, हैदराबाद से शालिनी झा, पूना से संदली ठाकुर, दरभंगा से दीपेश चंद्र , करुणा भंडारी और अमेरिका से (ऑनलाइन) पीटर ज़िर्निस उपस्थित हो कर इस सभा का संचालन किया।
कलाकार शालिनी झा ने सभा का शुभारंभ करते हुए अपनी प्रारंभिक कला यात्रा से उपस्थित युवा कलाकारों का मनोबल बढ़ाया। वहीँ कलाकार अविनाश कर्ण ने सकारात्मक भावना से कलाकारों को एकजुट होकर एकदूसरे की सहायता करते हुए मधुबनी में कला का सुन्दर माहौल तैयार करने की बात कही।
कलाकार प्रतीक प्रभाकर ने दिवंगत कलाकार गुंजेश्वरी देवी को समर्पित एक वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “गूंज” आयोजित करने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इस संघ के माध्यम से यह गूंज दूर तक जायेगी। कला विचारक एवं संरक्षक कौशिक झा ने अतीत में हुए पुरुष एवं महिला कलाकारों के साथ मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, घरेलु एवं आर्थिक उत्पीड़न पर चर्चा करते हुए कहा कि मिथिला आर्टिस्ट एसोसिएशन का गठन बहुत पहले हो जाना चाहिए था।
टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस,मुम्बई की असिस्टेंट प्रोफेसर संदली ठाकुर ने महिला उत्पीड़न की रोकथाम के लिए कलाकारों को सामाजिक संगठन से जोड़ने और उनकी सहायता पर विस्तृत चर्चा किया।
वहीं दरभंगा से फिल्मकार दीपेश चंद्रा एवं करुणा भंडारी ने फिल्म और सोशल मीडिया की सामाजिक उत्थान में भूमिका के महत्व पर चर्चा किया।
सभा में उपस्थित वरिष्ठ कलाकार विनीता झा ने कहा कि कैसे अपनी प्राचीन संस्कृति-परंपरा का निर्वहन करते हुए बेटियां स्वावलंबी बने, जिससे परंपरा भी आगे बढ़ती रहे और महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।
युवा वर्ग के कलाकारों में प्रेमलता ने महिलाओं से छेड़-छाड़ पर इसकी रोकथाम की बात कही। आँचल झा ने समाज में कई लोगों की मानसिक संकीर्णता पर चर्चा किया।
वहीँ, स्नेहा झा ने बताया कैसे माताएं अपनी बेटियों को स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
वहीं सरवरी बेगम ने बताया कि मुस्लिम समाज में पेंटिंग करना और बेटियों का बाहर निकल कर कार्य करना लगभग वर्जित है, जिस पर कार्य किया जाना अति आवश्यक है।
वहीँ, दीप्ती झा ने महिलाओं के साथ यौन शोषण और धोखाधड़ी के रोकथाम पर चर्चा किया। वहीँ, वंदना देवी ने महिलाओं युवा कलाकारों को उत्पीड़न के खिलाफ मुखर होने का संदेश दिया।
वहीँ, रंगकर्मी अर्जुन राय ने नुक्कड़ नाटक वर्कशॉप में युवा कलाकारों के शामिल होने की बात कही।
अमेरिका से कलासमीक्षक पीटर ज़िर्निस ने कहा कि मिथिला आर्टिस्ट एसोसिएशन न केवल महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित है बल्कि हर वर्ग के कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए हर प्रकार से उनकी मदद करने के उद्देश्य से गठित की गई है जिसके लिए कौशिक झा, शालिनी झा, प्रतिक प्रभाकर और अविनाश कर्ण महत्वपूर्ण चार स्तम्भ हैं और इनके बिना इसका गठन नामुमकिन था।
सभा के समापन में सदस्यों द्वारा निर्णय लिया गया कि शारीरिक रूप से अक्षम वृद्ध कलाकारों की पहचान कर उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान किया जाए, सामाजिक उत्पीड़न के रोकथाम में कला का उपयोग किया जाए, बाल साहित्य में हिंसा की रोकथाम पर कला का प्रयोग किया जाए और मिथिला के समस्त कला शैलियों के डॉक्यूमेंटेशन पर कार्य किया जाए। इसके साथ ही अगले वर्ष तक के समस्त कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई।
