इस बढ़ती गर्मी में मधुबनी जिले का तापमान भी 42-43 डिग्री के पास पहुंच गया है। प्रशासन लगातार हीट वेव व लू को लेकर अलर्ट जारी कर रहा है। लोगों का घर से दिन में निकलना मुश्किल हो गया है। लेकिन सरकार व शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण इस तपती धूप में प्रारंभिक कक्षाओं के बच्चे पेड के नीचे खुले आसमान में पढ़ने को मजबूर हैं। दिन में 11 बजे लगभग तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जा रही है। ऐसे में बच्चों को पेड के नीचे जमीन पर बैठकर पढाई करना। क्या? क्या बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं है? जिले के आधा दर्जन विद्यालय ऐसे हैं, जहां बच्चे पेड के नीचे खुले आसमान में पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं अन्य दर्जनों विद्यालयों में बरामदे आदि पर धूप के तपिश में पढ़ने वाले बच्चों की बात की जाय, तो यह संख्या 100 के पार पहुंच सकती है। प्रारंभिक कक्षाओं में भूमि व भवन की कमी का खामियाजा छोटे छोटे बच्चों को उठाना पड़ रहा है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार जिले में 50 प्रारंभिक विद्यालयों को भूमि ही नहीं है। जबकि 83 ऐसे प्रारंभिक विद्यालय हैं, जो दूसरे स्कूलों में टैग कराया गया है। ऐसे में टैग वाले स्कूलों में जगह की कमी के कारण बरामदे या बाहर बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। लगभग 70 विद्यालयों में पेयजल की भी उचित व्यवस्था नहीं है। स्थिति यह है कि वर्ग 01 से 05 तक के प्राथमिक विद्यालयों में अधिकांश जगहों पर बेंच डेस्क की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।
जिले में भूमिहीन और भवनहीन विद्यालयों का आंकड़ा
जिले के 50 ऐसे विद्यालय हैं, जिसको ना तो अपना भूमि नहीं है और ना ही भवन। वहीं 83 ऐसे विद्यालय हैं, जिनको दूसरे स्कूल में टैग कर काम चलाया गया। वैसे विद्यालय जो भूमिहीन है, उसमें अंधाराठाढी प्रखंड के 06, बासोपट्टी के 01, बेनीपट्टी के 10, बिस्फी 01, हरलाखी 01, जयनगर के 07, लदनियां 01, लखनौर 03, मधेपुर 01, मधवापुर 04, पंडौल 05, रहिका 05 व राजनगर के 6 विद्यालय शामिल हैं।
