•दो दिनों से जारी बेमियादी धरना
• व्यापारियों को बारंबार प्रताड़ित करने सहित सात सूत्री मांग
• तीन दिनों से मधवापुर में लाखों का व्यापार ठप
मधवापुर,मधुबनी।
मधवापुर चेम्बर ऑफ कामर्स के बैनर तले एसएसबी के मनमानी के विरुद्ध सात सूत्री मांगों को लेकर व्यापारी ने बाजार बंद कर दो दिनों से प्रखंड कार्यालय पर बेमियादी धरना जारी है। जहां मंगलवार को समर्थन देते हुए जिला पार्षद लक्ष्मी कुमारी आमरण अनशन शुरू कर दिया है। आक्रोशित व्यापारी काला पट्टी बांध कर एसएसबी की मनमानी के विरुद्ध जमकर नारेबाजी कर अपने गुस्से का इजहार किया। धरना सभा की अध्यक्षता चेम्बर के पूर्व महासचिव चेतना कुमार रश्मि व संचालन गणेश साह ने किया। इनकी प्रमुख मांगों में व्यापारियों की सामग्री लदी वाहनों के इन्ट्री की बाध्यता समाप्त करने, नेपाल से रोजमर्रा की वस्तु लेने आए नेपाली नागरिकों को प्रताड़ित करना बंद करें, माल वाहक वाहनों को आने जाने में अवरोध ना करने, भारत-नेपाल सीमा पर करोना काल में की गई बांस बल्ले का घेरा बंदी अविलंब हटाने, मधवापुर में कस्टम कार्यालय अविलंब स्थापित करने सहित सात सूत्री मांगें शामिल हैं। जिला पार्षद लक्ष्मी कुमारी ने कहा कि सीमा पर एसएसबी जवानों की तैनाती के बाबजूद अपराधी मधवापुर में भीषण डकैती की घटना को अंजाम देते हैं। लेकिन अपराध रोकने के जगह आम व्यवपारियो को तबाह और तंग किया जाता है। भारत-नेपाल के साथ मैत्री पूर्ण संबंध के बाद भी सीमा पर आम नागरिकों को प्रताड़ित किया जाता है। बीते 11 सितंबर को बील होने के बाद भी प्याज लदी दस चक्का ट्रक जब्त कर कस्टम के हवाले कर दिया गया। एसएसबी का काम सीमा सुरक्षा है, जबकि एसएसबी कस्टम अधिकारी के तरह व्यापारियों के साथ व्यवहार करते है। इसलिए जब तक सभी मांगों को पूरा नही किया जाएगा, तब तक हमारा आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा।
इस धरना सभा को बादल गुप्ता, मुखिया राजेश कुमार, सरपंच बलराम कुमार झा, चेतन कुमार रश्मि, शत्रुघ्न प्रसाद गुप्ता, प्रदीप महतो, विनय पूर्वे, पितांबर मिश्रा, शिव कुमार साह, ललन प्रसाद, राजेश साह, अशोक गुप्ता, बद्री नारायण प्रसाद, राकेश नायक, शंकर गुप्ता सहित कई लोगों ने संबोधित किया।
इस बाबत बीडीओ राजेश कुमार ने कहा कि व्यापारियों की समस्या को लेकर वरीय अधिकारियों को सूचना दिया गया है, जल्द ही वार्ता कर समाधान किया जाएगा।
हालांकि आज खबर लिखे जाने तक कोई भी पदाधिकारी वार्ता करने नही पहुंचे थे।
