अपराह्न तीन बजे का समय : ठंड का मौसम लेकिन छोटे-छोटे बच्चे स्कूली बैग टाँगे एक बड़े से चबूतरे की ओर अग्रसर : यह प्रश्न करने पर कि अभी कहाँ जा रहे हो तो बच्चे सहर्ष बोलते हैं – दीदी से पढ़ने जा रहा। सहसा वहाँ रुक जाता हूँ। कुछ ही पल में एक कॉलेज गर्ल सी दिखनेवाली लड़की वहाँ पहुँचती है और उपस्थित बच्चे बड़े ही आदर भाव से उसे देखते हैं। फिर वह कुर्सी पर अपना स्थान ग्रहण करती है, और लगती है बच्चों को पढ़ाने।
अब उत्सुकता से भरकर उससे प्रश्न पूछने का दिल करता है। पूछने पर वह बताती है कि उसका नाम नीलू कुमारी है और उसके पिता का नाम श्री नथुनी मण्डल। नीलू पंडौल प्रखण्ड अन्तर्गत सरिसब-पाही(पूर्वी)पंचायत के वार्ड नम्बर-12 में पाहीटोल में रहती है और JMDPL कॉलेज, मधुबनी में स्नातक प्रथम वर्ष में भूगोल ‘प्रतिष्ठा’ की छात्रा है । उसका परिवार अति मध्यम कोटि का है , किन्तु उसके हौसले बचपन से ही बुलन्द थे। नीलू जब गरीबों, अतिपिछड़ों, दलितों के बच्चों को शिक्षाहीन देखती थी तो उसके मन में उन बच्चों को शिक्षित करने की चाहत जगती थी । धीरे-धीरे नीलू खुद बालिग हुई और कॉलेज में नामांकन करवाई तो उसकी मुलाकात जागरूकता अभियान संस्था, गंगौर, हरलाखी की संचालिका बिट्टू मिश्रा से हुई। बिट्टू सामाजिक कामों में लगी थी । नीलू बताती है कि बिट्टू मिश्रा उससे स्लम एरिया के बच्चों पर ध्यान देने की बात कही। बिट्टू की बातों एवं उसके द्वारा समाजहित में किये जानेवाले कामों से प्रेरित होकर नीलू कुमारी अपने क्षेत्र के गरीब, अशिक्षित परिवारों के सदस्यों से सम्पर्क की और उन परिवारों के बच्चों को एकत्र कर उन्हें पढ़ाना शुरू कर दी। 10 अगस्त, 2020ई. से नीलू कुमारी ने इन गरीब बच्चों का अध्यापन प्रारम्भ की। इस काम के लिए उसे एक सुरक्षित स्थान की जरूरत हुई तो इस नेक काम को देखते हुए वहाँ के ग्रामीण सुबोध मिश्र “ललनजी” ने अपने आवास का बड़ा सा बरामदा नीलू को निःशुल्क मुहैया करा दिया। अब नीलू वहाँ नित्य अपराह्न तीन बजे से पाँच बजे तक प्रथम वर्ग के छात्रों से लेकर पाँचवें वर्ग तक के 60 छात्र-छात्राओं को सभी विषय पढ़ाती है, साथ ही बच्चों को पेंटिंग और योग की शिक्षा भी समय-समय पर वह देती है जिससे कि उन बच्चों का बहुमुखी विकास हो सके।
वार्ड संख्या-12 के वार्ड सदस्य भरत कुमार ने बताया कि हमारे वार्ड की लड़की नीलू इतनी बेहतरीन समाजसेवा कर रही है कि इसकी जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम ही होगा। अगर इस तरह की लड़की हर क्षेत्र में अशिक्षा मिटाने का काम करने लगे, तो शायद पूरे देश से अशिक्षा समाप्त हो जाए। वस्तुतः नीलू कुमारी का प्रयास स्तुत्य है। आवश्यकता है कि ऐसी समाजसेवी लड़कियों को समाज के हर स्तर पर सहयोग मिले जिससे कि उनका उत्साहवर्द्धन भी हो सके और ऐसी लड़कियाँ दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकें।
