
उक्त आयोजन में जिले भर के उर्दू भाषा के जानकर व चाहने वाले शामिल हुए। आयोजन के शुरुआत में बताया गया कि इल्म से ही इंसान मुकम्मल होता है और इस से ही लोगों की जिंदगियां रौशन होती हैं।
मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि भारत विविध भाषाओं से समृद्ध देश है और यहां के गंगा जमुनी तहजीब की दुनिया में मिशाल पेश की जाती है। उन्होंने भाषा की शुद्धता के आइने में उर्दू को एक मधुर भाषा कहा और अपनी बात को रखने का शानदार जरिया बताया। उन्होंने अपने संबोधन में अपने उर्दू के प्रति लगाव का भी जिक्र किया और बताया कि प्रारंभिक तौर पर उन्होंने भी उर्दू सीखने की कोशिश की थी। परंतु, अन्य कार्यों में व्यस्तता के कारण सब छूटता चला गया। उन्होंने दैनिक जीवन में उर्दू की उपयोगिता पर रौशनी डालते हुए कहा कि हम में से ज्यादातर लोग अखबार शब्द का इस्तेमाल करते हैं जो उर्दू का एक प्रचलित शब्द है। उन्होंने कहा कि लोग चाहे कोई भी भाषा सीख लें परंतु अपनी मातृभाषा को न भूलें। उन्होंने सेमिनार की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इसके आयोजन से उर्दू प्रेमियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
सेमिनार को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने कहा कि वो उर्दू जानने के खुद ख्वाहिशमंद रहे हैं। उन्हें यह जुबान बहुत पसंद है और अपने प्रशिक्षण अवधी के दौरान उन्होंने उर्दू सीखने की कोशिश भी की थी। अलबत्ता वो पूरा तो नहीं सीख पाए। परंतु उनका उर्दू के प्रति लगाव आज भी है।
सेमिनार में नोडल पदाधिकारी के रूप में बोलते हुए विशेष कार्य पदाधिकारी जिला गोपनीय शाखा, अमेत विक्रम बैनामी ने उर्दू को उपादेयता पर प्रकाश डाला।
उक्त अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा उर्दू की किताबों को पीढ़ी दर पीढ़ी उपलब्ध कराने वाले आजाद बुक स्टोर्स के संचालक साजिद आजाद को सम्मानित भी किया गया। सेमिनार में सूत्रधार की जिम्मेवारी वसीम जमाल, उर्दू अनुवादक, प्रखंड पंडौल के द्वारा बखूबी निभाई गई।
मौके पर उप विकास आयुक्त विशाल राज, हैदर इमाम, वरीय उर्दू अनुवादक, असरफ जमील, उर्दू अनुवादक, मो मुहतदा, उर्दू अनुवादक, राजू कुमार, इरफान अली, बुसरा हबीब, अब्दुल मन्नत सहित अन्य अधिकारी व उर्दू के जानकार मौजूद थे।

