मधुबनी जिलाधिकारी अरविन्द कुमार वर्मा की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में डिस्ट्रिक हेल्थ सोसायटी, मधुबनी एवं डिस्ट्रिक टोबैको कंट्रोल सेल (डीटीसीसी) के संयुक्त तत्वावधान में ओरिएंटेशन कम ट्रेनिंग वर्कशॉप ऑफ एंटी टोबैको स्क्वॉड मेंबर्स एंड अदर स्टेकहोल्डर्स फॉर इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन ऑफ टोबैको कंट्रोल लेजिस्लेशन (कोटपा) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि तंबाकू चाहे सिगरेट के रूप में हो अथवा खैनी या पान मसाले के रूप में, ये सभी रूपों में स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालने वाले होते हैं। इसके निषेध के लिए कोटपा कानून के साथ साथ जुविनाइल जस्टिस एक्ट, फूड सेफ्टी एक्ट और म्युनिसिपल एक्ट के तहत कड़े कानून बने हुए हैं। आज जरूरत जन जागरूकता की है, ताकि लाखों लोगों को तंबाकू उत्पादों से होनेवाले नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए सभी सरकारी कार्यालयों के साथ साथ विद्यालयों में भी तंबाकू के दुष्प्रभाव को दर्शाने वाले बोर्ड लगाए जाएं, साथ ही साथ इन जगहों को तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करने संबंधी बोर्ड भी लगाए जाएं। उन्होंने विशेष रूप से विद्यालयों में बच्चों को जागरूक करने और उनके माध्यम से परिवार के बड़े सदस्यों तक तंबाकू का सेवन न करने संबंधी संदेश पंहुचाने को एक अच्छा कदम बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिले के सभी विद्यालयों के 100 गज के दायरे में अवस्थित तंबाकू उत्पाद बेचने वाले दुकानों को बंद कराएं, साथ ही उनपर जुर्माना भी लगाएं। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सभी नगर निकायों और प्रखंड मुख्यालयों में अभियान चलाकर तंबाकू के प्रचार करने वाले बोर्ड को हटवाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी सार्वजनिक स्थलों पर तंबाकू का सेवन वर्जित है। ऐसे में लगातार ड्राइव चलाकर छापेमारी करते हुए कार्रवाई करें। ताकि, लोगों में तंबाकू सेवन के विरुद्ध बने कानूनों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके। उन्होंने कहा कि आज विश्व क्षयरोग दिवस है और टी वी के उन्मूलन हेतु सरकार लगातार काम कर रही है। परंतु, टीवी के ज्यादातर मरीजों में तंबाकू सेवन की लत देखी जाती है। ऐसे में तंबाकू के सेवन से दूरी बनाने से क्षय रोग के उन्मूलन में खासी सहायता मिल सकेगी।
तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गठित त्रिस्तरीय छापामार दस्ता के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम हेतु राज्य सरकार की तकनीकी सहयोगी संस्था सोशियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसायटी (सीड्स) के कार्यपालक निदेशक दीपक मिश्रा ने बताया कि सभी प्रकार के पान मसालों में मैग्नेशियम कार्बोनेट और निकोटिन पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। ऐसे में समाज के सभी तबके को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक होना होगा।
उक्त अवसर पर विशेष कार्य पदाधिकारी जिला गोपनीय शाखा अमेत विक्रम बैनामी, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, मुख्यालय, प्रभाकर तिवारी सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
