मधुबनी जिले के कई प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायत के मस्जिदों व घरों में रोजेदारों ने मगरीब की अज़ान सुनकर पांचवे रोज़े का इफ्तार किया। जिले के कलुआही प्रखंड के स्थानीय जामा मस्जिद मे लोगों ने मिलकर इफ्तार किया। वही मोहम्मद इस्लाम ने बताया की इफ्तार के सामान की व्यवस्था मस्जिद में भी किया जाता है और मस्जिद से सटे घरों के लोग अपने-अपने घरों से भी इफ्तार का समान लेकर मस्जिद आते हैं और सभी आपस में मिलजुल कर एक साथ मस्जिद में ही इफ्तार करते हैं।
वहीं, स्थानीय प्रखंड के मलमल मस्जीदे आयशा कमेटी के सदस्य फैजुल हसन ने बताया कि रमज़ान का महीना सब्र और अज़मतो का महीना है और इस महीने में पांच वक्त कि नमाज़ के साथ तरावी की भी नमाज़ पढ़ी जाती है। तरावी की नमाज़ कुल 20 रकात की होती है। पुरुष जमात के साथ मस्जिदों में यह नमाज अदा करते हैं और महिलाएं अपने घरों में ही नमाज़ अदा करती है। उन्होंने बताया के रमज़ान का महीना तीन अशरा का होता है। पहला बरकत, दुसरा रहमत, तीसरा मगफिरत,
इस महीने में पांच शबे कद्र कि रातें होती है। अल्लाह फरिश्तों के द्वारा यह एलान करवाते हैं के, है कोई मगफिरत चाहने वाला, है कोई जहन्नम से माफ़ी चाहने वाला, इन रातों में अल्लाह अपने बंदों कि दुआओं को कुबूल करते है। इन तीन लोगों की दुआ कबूल नहीं होती, पहला माता पिता को दुख देने वाला, दुसरा अपने रिश्तेदारों से कटाझ रखने वाला, तीसरा शराब पीने वाला।
पढ़ी जाने वाली नमाज़ों के नाम और रकात :
- तहज्जुद की नमाज़, 2 रकात से 12 रकात तक पढ़ी जाती है
- फजिर की नमाज़ चार रकात कि होती है
- दो सुन्नत दो फ़र्ज़,
- जोहर की नमाज़ बारह रकात कि होती है
- चार सुन्नत, चार फ़र्ज़, दो सुन्नत, दो नफिल,
- असर की नमाज़ आठ रकात कि होती है
- चार सुन्नत, चार फ़र्ज़,
मगरिब की नमाज़ सात रकात की होती है - तीन फ़र्ज़, दो सुन्नत, दो नफिल,
ईशा की नमाज़ सत्रह रकात की होती है - चार सुन्नत, चार फ़र्ज़, दो सुन्नत, दो नफिल,तीन वित्त, दो नफिल,
तरावी की नमाज़ बीस रकात की होती है - रमज़ान के महीने में सलातुत तस्बीह कि नमाज़ का भी लोग एहतमाम करते हैं, यह नमाज़ चार रकात की होती है।
इस महीने में महिलाओं का बड़ा योगदान :
रमजान के इस पवित्र महीने में महिलाओं का अपने परिवार में बहुत ही बड़ा योगदान हुआ करता है। महिलाए सुबह तीन बजे उठकर सेहरी बनाती है और परिवार के सभी सदस्यों को उठाकर सेहरी खिलाने के बाद तहज्जुद की नमाज़ पड़ती है। कुछ ही क्षणों बाद फजिर की अजान होती है और वो फजिर कि नमाज अदा करती हैं और कुरान की तिलावत करती हैं। अहले सुबह उठकर अपने बच्चों को उठाकर नहला धुला कर स्कूल भेजती हैं। दोपहर के तीन बजे से ही इफ्तार और रात का खाना बनाने कि तय्यारी में जुट जाती है, इफ्तार के लिए कई तरह का पकवान और फलों को काटकर इफ्तार की थाली सजा कर तैयार कर लेती हैं। संध्या 5:30 बजे तक दस्तरखान बिछाकर इफ्तार को दस्तरखान पर सजाकर रख दिया करती है।
बढ़ी महंगाई में इफ्तार का समान हुआ महंगा :
प्रखंड क्षेत्र के मलमल समाज सेवी अल्तमश अहमद, सैफ अली, मोहम्मद गुड्डू, आसिफ अली, डॉ. महबूब आलम ने बताया कि इस बार रमजान में इफ्तार में जो सामग्री का उपयोग किया जाता है, जैसे के फल चना मटर इस बार यह सभी सामग्री की दरों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। जैसे के लच्छी सेवई ₹100 से लेकर ₹150 प्रति किलो, खजूर ₹100 से ₹500 प्रति किलो, तरबूज़ ₹30 प्रति किलो, पपीता ₹50 प्रति किलो, खीरा ₹40 प्रति किलो, केला ₹70 प्रति दर्जन, चना ₹60 प्रति किलो, मटर ₹65 प्रति किलो, मुरही ₹60 प्रति किलो, सेब ₹140 प्रति किलो, संतरा ₹80 प्रति किलो, अंगूर ₹70 प्रति किलो, अनार ₹160 प्रति किलो, महंगाई आसमान छू रही है, जो बची कसर थी वो भी रसोई गैस ने पूरी कर दी है।
