- 21दिनों मे अब मिल पायेगा प्रमाण पत्र
अब जन्म प्रमाण पत्र के लिए लाभुकों को अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, न ही अब प्रमाण पत्र के लिए नजराना ही लगेगा। अस्पताल में प्रसूता के प्रसव होने के उपरांत 21 दिनों के अंदर उनके बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र हाथ में होगा। सभी अस्पतालों में इन प्रमाणपत्रों के बैकलॉग भी समाप्त होंगे। अभी भी स्वास्थ्य संस्थानों में वर्षों-वर्षों तक का जन्म प्रमाण पत्र लंबित है। कई लाभुकों को इस एवज में फाइन की बात बताकर पैसे भी ऐंठे जा रहे हैं। मधुबनी सदर अस्पताल सहित तमाम अस्पतालों में अब जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन कार्य करने वाले डाटा इंट्री ऑपरेटर के जिम्मे यह जन्म-मृत्यु पहचान पत्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मधुबनी जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि विभाग का पूर्व से ही निर्देश है कि प्रसव के बाद डिस्चार्ज के समय ही बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनाकर हाथ में दे देना है। मगर कई तरह की परेशानियों की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में विभाग ने 21 दिनों में जन्म प्रमाण पत्र बनाकर बच्चों के माता-पिता को दे देना है, इस दिशा में पहल शुरू हो गई है।
इस संदर्भ में मधुबनी जिला सिविल सर्जन डॉ. ऋषिकेष पांडेय ने सदर अस्पताल के अधीक्षक सहित झंझारपुर, जयनगर, फुलपरास, बेनीपट्टी के अधीक्षक सहित सभी पीएचसी प्रभारी को पत्र लिखकर 21 दिनों में जन्म प्रमाणपत्र निर्गत कराने का निर्देश दिया है। इस कार्य की जिम्मेदारी प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांक न सहायक सह डाटा इंट्री ऑपरेटर से कराया जाना है। मगर कई स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसा नहीं हो पा रहा है। अनुश्रवण के क्रम में पाया गया कि अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण में काफी बैकलॉग है। इससे प्रतीत होता है कि प्रतिदिन यह कार्य नहीं होता है, जिस वजह से लाभुकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है, जबकि इसे मरीजों के डिस्चार्ज के साथ ही करना है।
बैकलॉग नहीं रखें :
सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिया कि स्वास्थ्य संस्थान अंतर्गत जन्म-मृत्यु पंजीकरण का कार्य का प्रभार प्रखंड मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक सह डाटा इंट्री ऑपरेटर को हस्तगत करा दें। यह कार्य सात दिनों के अंदर करने का निर्देश दिया है, साथ ही जन्म व मृत्यु पंजीकरण बैकलॉग नहीं रहे।
